उत्तरकाशी देवभूमि उत्तराखंड का प्रसिद्ध नगर है, इस नगर का उपनाम ‘उत्तर का काशी’ है, Uttarkashi Uttarakhand का पौराणिक नाम बाडा़हाट व सौम्यकाशी है। पहाड़ी जिला होने के कारण यहां पुराने समय से ही देवीय आपदाएं आती रहती है। जिसमें भूकंप एवं बाढ़ प्रमुख है। सन 1803 में भी इसी बाडा़हाट नगर में भयंकर बाढ़ एवं भूकंप आया था। जिसके कारण यह नगर क्षतिग्रस्त हो गया था।

उत्तरकाशी का दुबारा से पुनर्निर्माण शुरू हुआ और और वरुणावत पर्वत की तलहटी में भागीरथी नदी के दायी और इस नगर को बसाया गया। उत्तरकाशी पर्यटकों के लिए स्वर्ग है। यह नगर प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण हैं। यहां पर प्रकृति ने अपनी अनुपम छटा बिखेरी है साथ ही हिमालय से निकलने वाली जीवनदायिनी नदियां इस जनपद से भी गुजरती है, जिसमें भागीरथी असी गंगा वरुण नदी व टोंस नदी प्रमुख है।

Uttarkashi Uttarakhand का इतिहास, पर्यटन स्थल, भौगोलिक स्थिति। Uttarkashi Uttarakhand Temple, Tourist Places of Uttarkashi

उत्तरकाशी के पूर्व में टिहरी रियासत का भाग था, जिसे 24 फरवरी 1960 को अलग जनपद बनाया गया। इसका क्षेत्रफल 8016 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस जनपद की धार्मिक मान्यताएं भी अत्यधिक है, हिंदू धर्म में उत्तरकाशी का घाट बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि यहां पर गंगा नदी अपने शैशव अवस्था में है, और प्रदूषण रहित है।

इस जिले का पूरे भारत देश के लिहाज से सामरिक महत्व भी है, क्योंकि यह जनपद अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगा हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के साथ लगता है, भारत सरकार द्वारा इसी लियाज से उत्तरकाशी के दूरस्थ स्थानों का विकास हो रहा है। यह जनपद पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है, क्योंकि यहां की जलवायु स्वास्थ्यवर्धक है।

ऋषिकेश से उत्तरकाशी की दूरी 155 किलोमीटर है। सर्दी का मौसम समाप्त होने के बाद अप्रैल-मई मैं यहां पर मां यमुनोत्री धाम एवं मां मां गंगोत्री धाम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाते हैं गर्मी के मौसम में यहां पर देश-विदेश के पर्यटक घूमने आते हैं, और ट्रैकिंग राफ्टिंग पैराग्लाइडिंग इत्यादि बहुत से साहसी खेलो में प्रतिभाग करते हैं।

उत्तरकाशी जनपद क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखंड में चमोली के बाद दूसरे स्थान पर है। पूरा जनपद तीन विधानसभा क्षेत्रों विधानसभा क्षेत्रों  एवं 6 तहसीलों व 6 ब्लॉकों में बटा हुआ है जिसका विवरण निम्न है।

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विषय सूची

उत्तरकाशी का प्रशानिक विवरण (Uttarkashi Uttarakhand Administrative Details)

जनपद के विधानसभा क्षेत्र

  • गंगोत्री
  • यमुनोत्री
  • पुरोला

जनपद की तहसीलें

  • डुँडा
  • भटवाड़ी
  • पुरोला
  • बड़कोट
  • मोरी
  • चिन्यालीसौड़

जनपद के ब्लॉक

  • मोरी
  • पुरोला
  • नौगांव
  • डुँडा
  • चिन्यालीसौड़
  • भटवाड़ी

उत्तरकाशी की स्थिति 

देश भारत
राज्य उत्तराखंड
मण्डल गढ़वाल
मुख्यालय उत्तरकाशी
जिले स्थापना 24 फरवरी 1960 (टिहरी से अलग)
साक्षरता 2011 की जनगणना के अनुसार 785.1
पुरुष साक्षरता 2011 की जनगणना के अनुसार 88.79
महिला साक्षरता 2011 की जनगणना के अनुसार 62.35
लिंगानुपात साक्षरता 2011 की जनगणना के अनुसार 916
जनसंख्या घनत्व साक्षरता 2011 की जनगणना के अनुसार 41
जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 330086
ग्रामीण जनसंख्या 305781
नगरीय जनसंख्या 24305

उत्तरकाशी के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Major Attractions in Uttarkashi Uttarakhand in Hindi)

टूरिज्म की दृष्टि से संपूर्ण जनपद बेहद खास है, साथ ही पर्यटन की यहां पर अपार संभावनाएं हैं, यहां पर उत्तराखंड में चार धामों में से दो धाम गंगोत्री एवं यमुनोत्री स्थित है। जिसके कारण यहां देश विदेश के पर्यटक घूमने आते हैं, और इसके साथ-साथ यहां पर ट्रैकिंग पर्वतारोहण व अन्य प्रकार के साहसी खेलों का आयोजन प्रतिवर्ष होता है। जनपद के सभी पर्यटन स्थल का विवरण अधोलिखित है।

गंगोत्री (Gangotri Uttarakhand in Hindi)

पर्यटन की दृष्टि से गंगोत्री धाम का पूरे उत्तराखंड में अहम स्थान है। पर्यटन के साथ यह स्थल हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र है। जिसके कारण यहां देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। यह स्थल समुद्र तल से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, और ऋषिकेश मार्ग की ओर से आने पर ऋषिकेश से 255 किलोमीटर दूर हैं, जिला मुख्यालय से गंगोत्री की दूरी लगभग 99 किलोमीटर है।

गंगोत्री में भागीरथी का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध है, इस मंदिर में मां गंगा, मां अन्नपूर्णा एवं मां पार्वती की मूर्तियां स्थापित है। गंगोत्री की पौराणिक समय से ही बहुत मान्यता है, कहा जाता है कि जब राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी, और मां गंगा को स्वर्ग लोक से धरती लोक पर उतारा था। उस समय गंगा की धारा बहुत ही विकराल थी, जिसके कारण सभी देवता चिंता में डूब गए थे।

एक मान्यता के अनुसार सभी देवता भगवान शंकर के पास गए और गंगा की स्थिति से अवगत कराया तभी भगवान शिव ने इसी स्थान पर गंगा को अपनी को अपनी अपनी जटाओं में बांधा था, और मात्र एक छोटी सी धारा को पृथ्वी पर छोड़ दिया था। गंगोत्री मंदिर बहुत ही पुराना है, इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में आज से लगभग 260 वर्ष पूर्व हुआ था।

मंदिर की स्थापना गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने कराई थी। इस मंदिर का पुनरुद्धार राजस्थान के जयपुर के राजा माधो सिंह ने कराया था। गंगोत्री धाम के कपाट प्रति वर्ष अप्रैल माह में खुलते हैं। खुलने के दिन ही मां गंगा की डोली गंगोत्री धाम के लिए रवाना होती है।

सर्दी के मौसम में मां गंगा की डोली मुखवा ग्राम के मार्कंडेय मंदिर मंदिर में होती है। गंगोत्री धाम के आसपास बहुत से पर्यटन स्थल है। जिनमें सूर्य कुंड, गौरीकुंड, पतंगाना एवं भैरव झाप स्थित है। गंगोत्री में विशेष आकर्षण जल में डूबा हुआ शिवलिंग है, यहां पर भागीरथी नदी में केदार गंगा मिलती है।

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गौमुख (Gomukh Gangotri in Hindi)

गंगा (भागीरथी) नदी का उद्गम स्थल गौमुख हिमनद है। यह स्थल गंगोत्री धाम से 18 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से 4023 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गोमुख की उत्तरकाशी उत्तरकाशी से दूरी लगभग 105 किलोमीटर के आसपास है। यह स्थान बेहद ही खूबसूरत एवं आकर्षक है। गोमुख से ही भारत की सबसे लंबी व पवित्र नदी निकलती है। गर्मी के मौसम में यह स्थान पर्यटन के लिए बेहद खास माना जाता है।

गंगोत्री से यहां के लिए पैदल ही चलना पड़ता है। यहां पर जाने के लिए पर्यटक गर्मी के मौसम में भी गर्म कपड़े जरूर लेकर जाएं, यहां का तापमान हमेशा कम रहता है, जिससे हमेशा ठंड का आभास होता है। गोमुख से 6-7 किलोमीटर आगे बढ़ने पर एक और खूबसूरत जगह नंदनवन तपोवन है, जो पर्यटकों एवं पर्वतारोहियों को बेहद पसंद है। गोमुख से 14 किलोमीटर दूर चलने पर भोजबासा मैं यात्रियों के लिए एक बंगला है, यहां पर यात्रियों के रुकने ठहरने की उचित व्यवस्था है।

यमुनोत्री (Yamnotri Uttarakhand in Hindi)

उत्तरकाशी जिले से 131 किलोमीटर दूर गंगोत्री धाम के ठीक पश्चिम में यमुनोत्री धाम स्थित है, यमुनोत्री धाम के लिए भी यात्रियों को हनुमान चट्टी से 6 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती तय करनी पड़ती करनी पड़ती है, यमुनोत्री धाम यमुना नदी के बाएं तट पर है। इस मंदिर की स्थापना 1919 में गढ़वाल नरेश प्रताप शाह ने की थी, तथा इस जगह मंदिर का पुनर्निर्माण राजस्थान जयपुर की महारानी ने कराया था।

यमुनोत्री धाम सर्दियों के मौसम में अत्यधिक ठंडा रहता है, यहां पर दिसंबर जनवरी के महीने में खूब बर्फबारी होती है। जिसके कारण यहां मंदिर के कपाट भी बंद हो जाते हैं, और मां यमुना की डोली को पूजा हेतु खरसाली गांव में रखते हैं। अप्रैल माह में कपाट खुलने के बाद मां की डोली को खरसाली से वापस यमुनोत्री ले जाते हैं और वहां पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां यमुना की डोली की पुनर्स्थापना होती है, और खरसाली गांव के पुजारी इस मंदिर में पूजा पाठ करते हैं।

यमुनोत्री बेहद खूबसूरत धाम है, यहां से आप हिमालय की ऊंची ऊंची चोटियों के साक्षात दर्शन कर सकते हैं। यमुनोत्री के आसपास तीन गर्म पानी के कुंड है, जो अत्यधिक प्रसिद्ध है। इस कुंड का पानी बहुत गर्म है, जिसके कारण इसमें चावल आलू डालने पर थोड़ी देर में ही पक जाता है, इसको पकाने के बाद लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

सप्त ऋषि कुंड यमुनोत्री से 16 किलोमीटर दूर है, जो पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षण का केंद्र है। एक मान्यता के अनुसार (श्रीकंठ ,बंदरपूंछ ,यमुनोत्री काठां) सामूहिक नाम (बंदरपूंछ) को पौराणिक समय में कालिंदी पर्वत भी कहा गया है, जिसके कारण यमुना जी का एक नाम कालिंदी भी है।

कालिंदी यमुना को सूर्य पुत्री शनि एवं यम की बहन के रूप रूप में माना जाता है, कुछ लोग कालिंदी को कृष्ण की पटरानी के रूप में भी मानते हैं। यमुनोत्री में देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु मां यमुना जी के दर्शन करने के लिए आते हैं जिसके कारण यात्रा सीजन में खूब चहल-पहल रहती है।

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शक्ति मंदिर (Shakti Temple Uttarakashi in Hindi)

शक्ति मंदिर जनपद उत्तरकाशी में बहुत खूबसूरत एवं रमणीक स्थल है। यह विश्वनाथ मंदिर के सामने स्थित है। यहां पर यात्रा सीजन में बहुत सारे सारे पर्यटक दर्शन करते हैं। मंदिर में आकर्षण का केंद्र यहां पर एक विशालकाय त्रिशूल है, जिसकी ऊंचाई 6 मीटर के आसपास हैं।

त्रिशूल के ऊपर और नीचे के हिस्से लोहे और तांबे के बने हुए हैं, पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार इस त्रिशूल का अत्यधिक महत्व है, माना जाता है कि इसी त्रिशूल से मां दुर्गा ने अनेक राक्षसों का वध किया था। जिसके कारण हिंदू धर्म में इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple Uttarkashi in Hindi)

उत्तरकाशी में विश्वनाथ मंदिर सबसे पुराने मंदिर में से एक है। विश्वनाथ मंदिर में शिव भगवान की पूजा होती है। प्रत्येक दिन यहां पर ब्राह्मणों द्वारा जप और पूजा पाठ किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। तीनों काशी वाराणसी, गुप्तकाशी और उत्तरकाशी में काशी विश्वनाथ मंदिर की मान्यता हिंदू धर्म में अत्यधिक है,

यह मंदिर पूरे वर्ष भक्त गणों के लिए खुला रहता है, जिससे भक्तगण काशी विश्वनाथ महाराज के दर्शन कर सकें। यह मंदिर उत्तरकाशी से मात्र 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का उद्धार टिहरी नरेश की महारानी कांति द्वारा 1857 में किया गया था। एक मान्यता के अनुसार यहां पर मां पार्वती भी विराजमान है।

मंदिर परिसर में विशाल त्रिशूल है, जिसमें मां का वास माना जाता है। विश्वनाथ मंदिर के पास ही प्रसिद्ध राजा भगीरथ ने तपस्या की थी, और मां गंगा को स्वर्ग लोक से धरती लोक पर उतारा था, और अपने पूर्वजों का उद्धार कराया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पौराणिक समय में भगवान परशुराम ने शिव की उपासना करने के लिए यह मंदिर बनाया था।

इस परिसर में जो चमत्कारिक त्रिशूल है, उसकी लंबाई 8 फुट 9 इंच और ऊंचाई 26 फीट के आसपास है। इस परिसर में भगवान शिव का शिवलिंग भी स्थापित है, जिसका झुकाव दक्षिण दिशा की ओर अधिक है।

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मनेरी (Maneri Uttarkashi in Hindi)

यह स्थल अपने शांति एवं सुरम्य वातावरण के लिए पूरे उत्तरकाशी में प्रसिद्ध है। उत्तरकाशी से गंगोत्री जाने वाले मार्ग पर 13 किलोमीटर दूर यह स्थान है। यहां भागीरथी नामक स्थान पर एक बांध बना हुआ है, इस बांध से 14 किलोमीटर दूर तिलोठ नामक स्थान पर टरबाइन के लिए जल पहुंचाया जाता है, और विद्युत उत्पादन किया जाता है।

यह स्थान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि बांध होने के कारण यहां पर झील का निर्माण हुआ है, जिसको पर्यटक पसंद करते हैं। मनेरी में कई तरह के साहसी खेलों का आयोजन भी होता है। जिसने ट्रैवलिंग ट्रैक पर्वतारोहण मुख्य पर्वतारोहण मुख्य है। मनेरी भाली परियोजना की आस पास बहुत बहुत पास बहुत से पहाड़ी गांव बसे हुए हैं। जिससे इस घाटी का आकर्षण और सुंदरता अत्यधिक बढ़ जाती है। इन गांवों में जामक , हीना, भाटासोड ,कामर मुख्य है।

उत्तरकाशी जनपद की घाटी फिल्म उद्योग के लिए बेहद खास है। यहां पर कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है, जिसमें अमिताभ बच्चन व शशि कपूर की फिल्म कभी-कभी 1976 मुख्य है। यह स्थल प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद खास है, फोटोग्राफी के लिए भी स्थल उपयुक्त है, क्योंकि जो डैम साइड पर झील निर्माण हुआ है, उसे घाटी के सुंदरता अत्यधिक बढ़ गई है।

मनेरी के आसपास दुर्गम प्रकार की जड़ी बूटियां आसानी से उपलब्ध हो जाती है, और इसके साथ-साथ आपको यहां देवदार चीड़, बुरांश के जंगल में प्रयाप्त मात्रा में देखने को मिलेंगे।

गंगनाणी (Gangnadi Uttarkashi in Hindi)

उत्तरकाशी से गंगोत्री मार्ग पर 26 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद भागीरथी नदी के बाएं तट पर एक गंध युक्त गर्म जल जल का स्रोत है। इस स्थान पर पर्यटक स्नान करके आगे की यात्रा प्रारंभ करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गंगनाणी में स्नान करने से आपके शरीर के बहुत से रोग दूर हो जाते हैं। चार धाम यात्रा में गंगनाणी का धार्मिक महत्व भी है, माना जाता है कि कुंड में स्नान करने से लोगों को पुण्य की प्राप्ति होती है ,क्योंकि इस कुंड का संबंध गंगा के जल से है।

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम के पिता श्री ऋषि जमदग्नि ने इस स्थल पर पर घोर तप किया था। जिसके कारण भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और वहां पर गंगा की धारा को कुंड में प्रवाहित किया। आज भी कुंड के पास ऋषि जमदग्नि का मंदिर है। जो अब तीर्थ के रूप के रूप तीर्थ के रूप में उभर रहा है।

एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि गंगनाणी में यमुना, गंगा और सरस्वती तीनों नदियों का संगम होता है, जिसके कारण इस को त्रिवेणी भी कहा जाता है ।बसंत के आगमन के समय इस स्थल पर पर एक भव्य मेले का आयोजन भी होता है। इस मेले में दूर-दूर से लोग प्रतिभाग करते हैं, और प्रसाद के रूप में इस कुंड का पानी बर्तनों में भरकर अपने साथ ले जाते हैं।

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हर्सिल (Harshil Uttarkashi in Hindi)

शांत एवं प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर उत्तराखंड का यह स्थल स्थल समुद्र तल से 2620 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, उत्तरकाशी से गंगोत्री जाने वाले मार्ग पर यह घाटी स्थित है। उत्तरकाशी से इसकी दूरी 73 किलोमीटर है। पूरे उत्तरकाशी में पर्यटक की दृष्टि से हर्सिल बहुत ही खूबसूरत स्थल है  हर्सिल का पूरे देश के लियाज से सामरिक महत्व भी है। इसलिए यहां पर अर्धसैनिक व सेना की दुकड़िया हर समय तैनात रहती है।

हर्सिल में गर्मी के मौसम में घूमने का आनंद ही कुछ और है। सर्दी के मौसम में यहां खूब बर्फबारी होती है, जिसके कारण यह घाटी बेहद खूबसूरत लगती है। हर्षिल बागवानी के लिए भी उपयुक्त स्थल है। सेब की खेती के लिए यह बेहद खास माना जाता है। हर्सिल के सेब पूरे भारत में प्रसिद्ध है, और बहुत ऊंची दरों पर बिकते हैं साथ ही प्रकृति प्रेमियों के लिए यह घाटी एक वरदान है।

इस घाटी में भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध फिल्म राम तेरी गंगा मैली की शूटिंग भी हुई है। जिसको दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इसके बाद से हर्षिल घाटी देश और दुनिया मैं काफी चर्चा में रही है।

हनुमान चट्टी (Hanuman Chatti in Hindi)

यह स्थल यमुनोत्री से 13 किलोमीटर दूर है, तथा समुद्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थल एक शांत रमणीक एवं प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। यात्रियों के लिए यहां पर नदी की प्राकृतिक सुंदरता एवं ग्रामीण परिवेश का भरपूर अनुभव प्राप्त होता है। यह स्थल पूर्ण रूप पूर्ण रूप से भगवान हनुमान जी के स्मृति के रूप में बसा हुआ है। इस मंदिर की मान्यता है कि इसी जगह पर हनुमान जी ने भीम के अहंकार को चूर-2 किया था। इसलिए यहां पर पूरे देश के कोने कोने से भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।

नचिकेता ताल (Nachiketa Tal Uttarkashi in Hindi)

उत्तराखंड के प्रसिद्ध झीलों में नचिकेता ताल का अपना अलग ही महत्व है यह स्थान पर्यटकों के लिए वरदान है यहां पर एक सुंदर झील है कहा जाता है कि ऋषि उदालक ने इस झील का निर्माण कराया था। और उन्होंने अपने बेटे के नाम पर झील का नाम नचिकेता ताल रखा है।

यह ताल समुद्र तल से 2453 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। इस ताल के आसपास देवदार, ओक एवं अन्य औषधि वृक्षों की भरमार है, ताल के आसपास बहुत हरियाली रहती है। यह ताल 7 फीट गहरा 29 फीट लंबा है, जिसके कारण यह बहुत ही आकर्षक लगता है। उत्तरकाशी के चौरंगी खाल से यह ताल 3 किलोमीटर के पैदल मार्ग की दूरी पर हैं। प्रकृति के प्रेमी अक्सर इस ट्रैक पर जाते हैं और इस झील की सुंदरता का आनंद लेते हैं।

दयारा बुग्याल (Dyara Bugyal in Hindi)

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बुग्यालों में दयारा बुग्याल का अलग ही महत्व है इस बुग्याल के आसपास सुंदर-सुंदर वृक्ष एवं मखमली घास है जो इस बुग्याल को और आकर्षित बनाते हैं यह बुग्याल समुद्र तल से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।

उत्तरकाशी से भटवाड़ी की तरफ की तरफ जाने पर यहां से एक रास्ता इस बुग्याल के लिए जाता है इस बुग्याल की दूरी उत्तरकाशी से 29 व भटवाड़ी से 18 किलोमीटर से 18 किलोमीटर है। पर्यटन की दृष्टि से यह स्थल बेहद खूबसूरत एवं रमणीक है बेहद खूबसूरत एवं रमणीक है इस बुग्याल में वर्ष भर भर पर्यटक आते रहते हैं सर्दी के मौसम में यहां का नजारा अत्यंत मनमोहक हो जाता है पूरा बुग्याल बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है और अनेक प्रकार के खेलों का आयोजन बर्फ के ऊपर इस बुग्याल में होता है।

हरकी दून (Harki Doon in Hindi)

हर की दून बहुत ही रमणीय स्थल है यह एक समतल घाटी है उत्तरकाशी से इसकी दूरी 176 किलोमीटर के आसपास है यह घाटी समुद्र तल से 3500मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिए वरदान है यहां पर यात्री ट्रेकिंग के लिए अक्सर आते हैं और इस शांत घाटी घाटी का आनंद उठाते हैं ।

इस घाटी से यमुना जी की दो सहायक नदियां रुपीन वह सुपिन बहती है जो इस घाटी की सुंदरता को अत्यधिक बढ़ाती है यही नदियां आगे चलकर टोंस के नाम से जानी जाती है जो जौनसार बावर के कालसी स्थित हरीपुर घाट पर यमुना जी के साथ संगम बनाती है।

टोंस नदी में पानी का बहाव अत्यधिक तेज है हर की दून अनेक प्रकार की वनस्पतियों एवं साथ में हिमालय की चोटियों से आच्छादित है इस घाटी से हिमालय पर्वत माला के कई पर्वत साक्षात दिखाई देते हैं ।जो मन को सुकून एवं शांति पहुंचाते हैं सर्दी के मौसम में यहां बर्फ के ऊपर अनेक प्रकार के खेलों का आयोजन भी होता है।

डामटा (Damta Uttarkashi in Hindi)

डामटा यमुना जी के किनारे बसा हुआ एक छोटा सा शहर है। यह शहर जनपद टिहरी के साथ सीमा रेखा बनाता है। इस नगर को उत्तरकाशी के प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है। चार धाम यात्रा के समय यात्रीगण इस स्थान पर रुक कर आगे की ओर बढ़ते हैं। यहां पर यात्रियों के लिए उचित दर पर स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध हो जाता है।

साथ ही पूछताछ एवं सहायता के लिए यहां पर एक पुलिस चौकी भी स्थापित है। डामटा के आसपास गढ़वाल एवं जौनसार के कई गांव हैं। व्यवसाय की दृष्टि से यह नगर उत्तरकाशी की हृदय स्थली के रूप में विकसित हो रहा है। यहां पर शिक्षा के लिए राजकीय इंटर कॉलेज सरकार द्वारा खोला गया है।

यहां पर नवंबर -दिसंबर में एक भव्य कबड्डी का टूर्नामेंट भी होता है जिसमें राज्य के खिलाड़ी प्रतिभाग करते हैं डामटा से थोड़ी दूरी पर यमुना में सैली गाड मिलती है जो सिसोई संगम के नाम से प्रसिद्ध है।

उत्तरकाशी कैसे पहुंचे (How to reach in Uttarkashi)

यदि आप भी इस यात्रा सीजन में चार धाम यात्रा पर आना चाहते है,तो आप इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें जिससे आपको सारी जानकारी प्राप्त हो सके।
उत्तरकाशी आप निम्न माध्यमों से पहुंच सकते हैं।
1 हवाई मार्ग द्वारा
2 रेल मार्ग द्वारा
3 सड़क मार्ग द्वारा

हवाई मार्ग द्वारा (By Air)

उत्तरकाशी पहुंचने के लिए अभी दैनिक रूप से संचालित एयरपोर्ट जौलीग्रांट है यदि आप देश की राजधानी दिल्ली से उत्तरकाशी के लिए आना चाहते हैं तो दिल्ली से देहरादून के लिए हर घंटे फ्लाइटें उपलब्ध रहती है।

देहरादून पहुंचने के बाद आपको वहां से टैक्सी या बस के माध्यम से उत्तरकाशी पहुंच सकते हैं भविष्य के लिए चिन्यालीसौड़ मैं एक हवाई पट्टी विकसित की जा रही है जिससे उत्तरकाशी पहुंचना और और भी आसान हो जाएगा और यात्रा सीजन में पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिलेगा।

रेल मार्ग द्वारा (By Train)

रेल मार्ग द्वारा उत्तरकाशी पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और देहरादून है यदि आप देश के किसी भी राज्य से उत्तरकाशी रेल के माध्यम से आना चाहते हैं तो आपको नजदीकी स्टेशन देहरादून पहुंच सकते हैं उसके बाद आपको टैक्सी या बस बस के माध्यम से उत्तरकाशी आसानी से पहाड़ी मार्ग का आनंद लेते हुए पहुंच सकते हैं ।

सड़क मार्ग द्वारा (By Road)

देहरादून से उत्तरकाशी की दूरी मसूरी होते हुए 150 किलोमीटर के आसपास है आप देहरादून या राज्य के किसी भी स्थान से उत्तरकाशी आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके लिए पहाड़ी क्षेत्र की बहुत सारी ट्रैवल्स एजेंसी काम करती है। और इसके साथ-साथ उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें भी नियमित तौर पर उत्तरकाशी के लिए चलती है।

यदि आप देश की राजधानी दिल्ली से उत्तरकाशी आना चाहते हैं, तो वहां से भी आपको उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें और अन्य प्रकार की प्राइवेट एजेंसियां की परिवहन सुविधा भी उपलब्ध रहती है जिससे आप उत्तरकाशी आसानी से पहुंच सकते हैं।

GOOGLE MAP UTTARKASHI

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