Glacier Meaning in Hindi, उत्तराखंड के प्रमुख ग्लेशियर। ग्लेशियर किसे कहते है।

Glacier – पूरे विश्व की यदि बात की जाय तो सम्पूर्ण पृथ्वी (Earth) का दसवां भाग (10%) पर ग्लेशियर है। ग्लेशियर हर साल, बर्फ के जमा होने से बने पहाड़ो या परतों को कहा जाता है, Glacier ऊंचाई या धुर्वीय वाले ऐसे स्थानों पर बनते हैं, जहां का तापमान शून्य से नीचे रहता है और हर साल बर्फ जमा होती रहती है, बर्फबारी होने से पुरानी बर्फ दबने लगती है और जिससे उसका घनत्व (Dnesity) बढ़ता जाता है। और हल्के क्रिस्टल (Crystal) से ठोस (Solid) बर्फ के गोले में बदलत जाती है

नई बर्फ पहले से जमा बर्फ को और नीचे दबाने लगती है जिससे वह और कठोर एवं ठोस हो जाती है, जिसे फिर्न (Firn) कहा जाता हैं. इस प्रक्रिया के तहत ठोस बर्फ के विशाल पहाड़ या परते निर्मित हो जाती है इस प्रकार अधिक दबाव से बिना किसी अधिक तापमान के ही पिघलने लगती है और निरंतर गति से बहने लगती है, और Glacier का रूप लेकर घाटियों (Valleys) के ओर बहने लगती है

Glacier किसे कहते है। उत्तराखंड के प्रमुख ग्लेशियर। ग्लेशियर कैसे बनते हैं, ग्लेशियर कैसे टूटते हैं। ग्लेशियर के प्रकार। Glacier Meaning in Hindi

Glacier Meaning in Hindi

यदि आप इंटरनेट पर Glacier Meaning in Hindi ढूंढ रहे हो, तो आप सही जगह पर है। आसान शब्दों में यदि कहा जाए तो ग्लेशियर पृथ्वी की ऊंचाई वाले स्थान (या उत्तरी गोलार्द्ध की तरफ) जहां का तापमान बहुत शून्य से नीचे रहता है, जहां पर हजारो सालों से बर्फ जमा होती जा रही है,

वही बर्फ पहाड़ो का रूप ले लेती है, उसी बर्फ के पहाड़ को हिमानी या हिमनद या Glacier कहा जाता है। गलेशियर पर्वतीय ढालों के कारण नीचे की तरफ प्रवाहमान होते है, यही कारण है कि यहां की हिमराशि सघन होती जाती है और ठोस रूप ले लेती है।

ग्लेशियर के प्रकार

ग्लेशियर के प्रकार की यदि बात कि जाय तो ग्लेशियर मुख्यतः दो प्रकार के होते है-

  • अल्पाइन ग्लेशियर या घाटी (Valley)
  • ग्लेशियर का पहाड़ (Mountain)

ग्लेशियर कैसे टूटते हैं। (How glaciers break)

जैसा कि हमने ऊपर Glacier Meaning in Hindi में बताया था कि ग्लेशियर हजारो सालों से जमा बर्फ के पहाड़ होते है। बर्फ के बने पहाड़ो या ग्लेशियर के टूटने के कहीं करण हो सकते है, जैसा की हमने ऊपर ग्लेशियर के प्रकार के बारे में बताया था कि ये दो प्रकार के होते है ,अल्पाइन व ग्लेशियर का पहाड़। इसमें से पहाड़ ग्लेशियर में टूटने की ज्यादा संभावना रहती है, हिमालय क्षेत्र में कई छोटे-बड़े ग्लेशियर है, हर वर्ष कहीं जगह से ये टूटते रहते है।

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ग्लेशियर टूटने के कई कारण हो सकते कारण हो सकते हैं, जिनमें से प्रमुख कारण निम्न है-

  • गुरुत्वाकर्षण बल
  • सिरों या किनारो पर अत्यधिक दबाव से कटाव के कारण।
  • ग्लोबल वार्मिंग।
  • बर्फ के नीचे भूकंप के झटके।
  • पिगले या जमा पानी का दबाव।

वैज्ञानिकों ने अपने ताजा अध्ययन में पाया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भी ग्लेशियर टूटने का  मुख्य कारण हैं। पृथ्वी पर ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर अत्यधिक तेजी से पिघलते हैं, जिसके कारण कारण उसका एक हिस्सा टूट जाता है।एवं वातावरण में अत्यधिक ऐसी गैसों का दबाव बढ़ गया है, जिसके कारण हमारे पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, प्रतिदिन लाखों-करोड़ों वाहनों से जो धुआं निकलता है एवं अन्य विषैली गैसों का मिश्रण वातावरण में होता है,

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इन सभी के कारण पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। ग्लेशियर के टूटने से संभव है, कि  वहां पर आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही हो सकती है। जिसका ताजा उदाहरण जनपद चमोली मैं रेणी गांव है, जिनके आस-पास सैकड़ों परिवार तबाह हो गए हैं। ग्लेशियर टूटने या फटने से आने वाली बाढ़ का नतीजा बेहद भयानक होता है, ग्लेशियर के अंदर से पानी अपना रास्ता खोज लेता है, जिसके कारण बर्फ से पिघलने की गति और बढ़ जाती है। जिससे बाढ़ आने का खतरा बना रहता है।

उत्तराखंड के प्रमुख ग्लेशियरों की सूची।(List of major glaciers of Uttarakhand.)

दुनागिरी ग्लेशियर चमोली
‌तिपराबमक ग्लेशियर चमोली
बद्रीनाथ ग्लेशियर चमोली
संतोपथ व भागीरथी ग्लेशियर चमोली
‌मिलम ग्लेशियर पिथौरागढ़
‌काली ग्लेशियर पिथौरागढ़
‌नामिक ग्लेशियर पिथौरागढ़
‌हीरामणि ग्लेशियर पिथौरागढ़
पिनोरा ग्लेशियर पिथौरागढ़
रालम  ग्लेशियर पिथौरागढ़
‌पोंटिंग  ग्लेशियर पिथौरागढ़
सुंदरढुंगी ग्लेशियर बागेश्वर
‌सुखराम ग्लेशियर बागेश्वर
पिण्डारी ग्लेशियर बागेश्वर
‌कफनी ग्लेशियर बागेश्वर
मैकतोली ग्लेशियर बागेश्वर
‌यमुनोत्री  ग्लेशियर उत्तरकाशी
‌गंगोत्री ग्लेशियर उत्तरकाशी
‌डोरयानी ग्लेशियर उत्तरकाशी
‌बंदरपूंछ ग्लेशियर उत्तरकाशी
‌खतलिंग ग्लेशियर टिहरी
‌चौराबाडी ग्लेशियर रुद्रप्रयाग
‌केदारनाथ  ग्लेशियर रुद्रप्रयाग

‌उत्तराखंड के सभी हिमनद प्राकृतिक रूप से बहुत ही आकर्षक एवं दर्शनीय है, यह हिमनद देखने में अत्यधिक सुंदर एवं रोचक लगते हैं, ये सभी ग्लेशियर प्रकृति का वरदान है, जिसको प्रकृति ने मानो अपने श्रृंगार के लिए बनाया है, साथ ही यह ग्लेशियर हमें जीवन भी प्रदान करते हैं, हिमालय से निकलने वाली सभी जीवनदायिनी नदियां इन्हीं हिमनदों के पिघलने से हर समय जलधारा प्रदान करती रहती है।इनमे से कुछ प्रमुख ग्लेशियर का विवरण निम्न है –

गंगोत्री हिमनद/ग्लेशियर (Gangotri Glacier in Hindi)

उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी में स्थित यह ग्लेशियर राज्य का सबसे बड़ा हिमनद या ग्लेशियर है। इसकी लंबाई 30 किलोमीटर एवं चौड़ाई 2 किलोमीटर के आसपास है। गंगोत्री ग्लेशियर बहुत ही खूबसूरत एवं आकर्षक है,  गंगोत्री ग्लेशियर  से ही गोमुख नामक स्थान से भागीरथी नदी निकलती है। जो देवप्रयाग में अलकनंदा के साथ मिलकर गंगा नदी कहलाती है, गंगा नदी भारत की राष्ट्रीय नदी है, जिसका जल हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है।

बंदरपूंछ हिमनद (ग्लेशियर) (Bandarpunch Glacier in Hindi)

बंदरपूंछ हिमनद उत्तरकाशी जिले मैं बंदरपूंछ पर्वत के उतरी ढाल पर स्थित है। इसकी लंबाई 12 किलोमीटर और लंबाई 12 किलोमीटर है यह हिमनद भी अत्यंत आकर्षक एवं दर्शनीय है और यहां प्रतिवर्ष देश विदेश से हजारों पर्यटक घूमने आते हैं, इसी ग्लेशियर पर ही यमुना नदी का उद्गम स्थल भी है, जो कालसी के पास हरिपुर नामक स्थान पर मैदान में प्रवेश करती है, और यहीं पर टोंस नदी इसमें आकर मिलती है।

चोराबाडी़ हिमनद ( ग्लेशियर) (Chorabadi Glacier in Hindi)

यह हिमनद भगवान शिव के स्थल केदारनाथ से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस हिमनद की लंबाई 12 किलोमीटर है, यहीं से मंदाकिनी नदी का उद्गम भी होता है, चोराबाडी़ ग्लेशियर के नजदीक प्रसिद्ध गांधी सरोवर स्थित है, यह सरोवर वर्ष 2013 कि केदारनाथ आपदा का प्रमुख कारण रहा है था, जिसमें अपार जन धन की क्षति हुई थी।

खतलिंग हिमनद (ग्लेशियर) (Khataling Glacier in Hindi)

खतलिंग हिमनद रुद्रप्रयाग, टिहरी एवं उत्तरकाशी के संगम पर स्थित है। भिलंगना नदी का उद्गम स्थल khatling Glacier के पास है। विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग स्फटिक लिंग भी यहीं पर है, यह ग्लेशियर बहुत ही आकर्षक एवं सुंदर है।

भागीरथी एवं संतोपथ ग्लेशियर (Bhagirathi and Santopath Glacier in Hindi)

यह Glacier चमोली जनपद में बद्रीनाथ धाम से 18 किलोमीटर की दूरी पर नीलकंठ पर्वत के पूर्वी भाग में स्थित है, संतोंपथ ग्लेशियर की लंबाई 13 किलोमीटर व भागीरथी ग्लेशियर की लंबाई 18 किलोमीटर के आसपास है। गर्मी के मौसम में अप्रैल से जुलाई तक पर्यटक यहां बद्रीनाथ, माणा, वसुधारा प्रपात होते हुए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यह ग्लेशियर भी बेहद खूबसूरत एवं आकर्षक है, यहां पर भी प्रति वर्ष हजारों पर्यटक घूमने आते है।

मिलम ग्लेशियर

Milam Glacier की लंबाई 16 किलोमीटर है,यह हिमनद पिथौरागढ़ से लगभग  200 किलोमीटर की दूरी पर मुनस्यारी तहसील में स्थित है ।यह ग्लेशियर कुमाऊं मंडल का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। इस ग्लेशियर से मिलम गोरी गंगा नदियां निकलती है, यदि आप भी मिलम ग्लेशियर घूमना चाहते हैं, तो आपको यहां के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।

पिंडारी ग्लेशियर

Pindari Glacier उत्तराखंड राज्य का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है, इस ग्लेशियर की लंबाई 30 किलोमीटर व चौड़ाई 400 मीटर है, यह हिमनद अनेक पर्वतों के मध्य स्थित है, जिनमें त्रिशूल, नंदा देवी, व नंदा कोट प्रमुख है। यहां जाने के लिए बहुत ही सरल व सुगम मार्ग है,

जिसके कारण यहां सैलानी वह ट्रैकिंग करने लिए प्रतिवर्ष हजारों लोग यहां आते हैं, इस हिमनद के आसपास ब्रह्मकमल ,मोनाल, कस्तूरी मृग, इत्यादि दिखाई देते हैं, यह ग्लेशियर बहुत सुंदर एवं आकर्षक है, वैज्ञानिक दावों के अनुसार पिछले 40 से 45 वर्षों में यह हिमनद अपने मूल स्थान से 0.5 किलोमीटर नीचे खिसक चुका है।

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