Chamoli District explain, Chamoli Aapda, in Hindi 2021

Chamoli District उत्तराखंड राज्य का एक खूबसूरत जिला है, जहां पर कहीं famous पर्यटन स्थल है। Chamoli District को सन 1960 में पौड़ी गढ़वाल से अलग करके बनाया गया था। उत्तराखंड का यह जिला पर्यटन के लिहाज से अति महत्वपूर्ण है।

जनपद चमोली का जिला मुख्यालय चमोली city से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था, बहुत समय पहले 1970 के लगभग, अलकनंदा में विनाशकारी बाढ़ आने के कारण चमोली शहर के अधिकांश भवन वह लोगों के घर इस विनाशकारी बाढ़ में ध्वस्त हो गए थे।

Chamoli District एक पहाड़ी जिला है, यहां का वातावरण साफ एवं स्वच्छ है, जो पर्यटकों को विशेष तौर पर पसंद आता है। गर्मी के समय में यहां का वातावरण और भी आनंदित हो जाता है, चमोली जिले का क्षेत्रफल उत्तराखंड राज्य के अन्य सभी जिलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा (बड़ा) है। यानि क्षेत्रफल में उत्तराखंड का सबसे बड़ा जिला है।

इसकी सीमाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन से लगती है, जिससे इस जनपद का सामरिक तौर पर भी काफी महत्व है। चमोली पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण जिला है, यहां पर हिमालय से निकलने वाली कही जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल है, जिसमें अलकनंदा नदी प्रमुख नदी है। इस जनपद का धार्मिक महत्व भी अत्यधिक है, यही कारण है कि यहां देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु आते हैं।

तहसीलें (Tehsil of Chamoli District in Hindi) 

chamoli district

Chamoli District में कुल 12 Tehsil हैं, जिसका विवरण निम्नानुसार है चमोली, जोशीमठ, पोखरी,कर्णप्रयाग, गैरसैण (उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी), थराली,देवाल, नारायणबगड़ ,आदिबद्री जिलासु, नंदप्रयाग और घाट है।

चमोली को Devtao ka nivas sthan (देवताओं का निवास स्थान) भी कहा जाता है, इस जनपद में अनेक प्रतिष्ठित मंदिर है, और साथ ही यह जिला चिपको आंदोलन (Chipko Andolan) की जन्मस्थली भी है, और यहां पर विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक जड़ी बूटियों का भंडार है।

जिसका उल्लेख हमारे वेदों में भी है यहां पर भांति भांति के बुग्याल भी है। जो इस जनपद की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं यदि कोई भी व्यक्ति या पर्यटक इन बुग्याल की सैर कर लेता है तो वह अपने आप को सौभाग्यशाली जिससे यहां पहुंचना और भी सुगम हो जाएगा । अभी इसका कार्य अंतिम चरण में चल रहा है।

चमोली के आसपास अन्य पर्यटक स्थल एवं नगर

गोपेश्वर (Gopeshwar Uttarakhand in Hindi)

Gopeshwer, Chamoli jile ka mukhyalay है। यहां पर अधिकतर सरकारी कार्यालय स्थित है। यहां से पूरे जिले का संचालन होता है। इसके साथ-साथ गोपेश्वर एक ऐसा पर्वतीय नगर है। जहां पर ना अत्यधिक ठंड पड़ती है ना अत्यधिक गर्मी।

यहां से थोड़ा ऊपर जाने पर हिमालय के साक्षात दर्शन होते हैं। गोपेश्वर हिमालय की गोद में बसा ऐसा पर्वतीय नगर है जो प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात है। गोपेश्वर के समीप गोपीनाथ महाराज का एक विशाल मंदिर है। यहां वर्षभर अनेक श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

गोपेश्वर में यात्रियों के लिए रूकने की उचित व्यवस्था है। यहां दर्जनों होटल और रेस्टोरेंट है जो उचित मूल्य पर यात्रियों के लिए साफ-सुथरे रूम और। खाने की व्यवस्था करते हैं।

जोशीमठ (Joshimath Chamoli in Hindi)

जोशीमठ Chamoli District का एक पहाड़ी नगर है यहां वर्षभर लाखों पर्यटक आते हैं। जोशीमठ, गोपेश्वर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है जोशीमठ में कई प्रकार के मठ और मंदिर है, जो इस पर्वतीय नगर की अत्यधिक शोभा बढ़ाते हैं, यहां वर्षभर पर्यटकों का सैलाब लगा रहता है।

यहां पर शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ भी है। Joshimath के आसपास गर्मी के मौसम में घूमने का आनंद ही कुछ और है जोशीमठ के ठीक सामने पश्चिम दिशा में हाथी पर्वत है जो दूर से देखने में हाथी जैसा दिखाई देता है। आप विष्णुप्रयाग से यहां के लिए पैदल ट्रैक भी कर सकते हैं।

यह ट्रैक लगभग 3 किलोमीटर का है जिसमें सैकड़ों पर्यटक ट्रैकिंग का आनंद लेते हैं। जोशीमठ में पर्यटकों के लिए उचित दाम पर साफ, स्वच्छ कमरे उपलब्ध हो जाते हैं जिसको आप ऑनलाइन या ऑफलाइन भी बुक करा सकते हैं।

जोशीमठ से भी हिमालय पर्वत के साक्षात दर्शन होते हैं यह नगर बद्रीनाथ धाम जाने का मुख्य पड़ाव है। यहां से बद्रीनाथ की दूरी लगभग 44 किलोमीटर के आसपास की है। ।

औली (Auli Chamoli in Hindi)

औली जोशीमठ के निकट ही 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आप सड़क मार्ग द्वारा या रोपवे के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं। रोपवे के माध्यम से औली पहुंचना, अद्भुत एवं साहस भरा कार्य है। रोपवे से औली के सफर मे आप पूरे Chamoli District की ऊंची नीची पहाड़ियों एवं आसपास की सभी नदियों का आकर्षक दृश्य देख सकते हैं। औली Chamoli District का एक महत्वपूर्ण स्थान है जो पूरे विश्व में शीतकालीन खेलों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

यहां पर सर्दियों के मौसम में खूब बर्फबारी होती है। होली के ढलान इन शीतकालीन खेलों के लिए उपयुक्त है। यहां पर सर्दियों के समय में देश विदेश के सैकड़ों खिलाड़ी इन खेलों में प्रतिभाग करते हैं।

यह शीतकालीन खेल औली की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं सर्दियों के समय अधिकतर यहां का तापमान 0 डिग्री से नीचे रहता है, लेकिन गर्मी के समय में यहां का वातावरण मनमोहक हो जाता है। औली समुद्र तल से 2540 मीटर से 3050 मीटर तक की ऊंचाई पर स्थित है।

बद्रीनाथ (विशाल बदरी) BadriNath Chamoli in Hindi

badrinath chamoli

बद्रीनाथ जोशीमठ से 44 किलोमीटर की दूरी पर Chamoli District me स्थित है एवं देहरादून से 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, बद्रीनाथ को पुराणों में नर नारायण आश्रम भी कहा गया है, क्योंकि बद्रीनाथ के ठीक सामने नर पर्वत है और ठीक पीछे नारायण पर्वत है इन दो पर्वतों के मध्य में बद्रीनाथ धाम स्थित है ।

बद्रीनाथ उत्तराखंड का एक पवित्र धाम है जिसमें भगवान विष्णु की पूजा होती है बद्रीनाथ धाम भारत के चारों धामों में प्रमुख धाम है, यहां पर लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष भगवान बद्री विशाल के दर्शन करने के लिए देश विदेश से आते हैं और भगवान बद्री विशाल का गुणगान पूरे विश्व में फैलाते है।

यहां यात्रा सीजन में हर दुकान और घरों में भगवान बद्री विशाल की स्तुति गान और आरती सुनाई देती है बद्रीनाथ मंदिर के ठीक नीचे अलकनंदा नदी से ठीक ऊपर एक तप्त कुंड है जिसमें हर समय गर्म जल की धारा बहती रहती है इस कुंड में स्नान के लिए पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्थान बने हुए हैं।

बद्रीनाथ मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष अप्रैल या मई के महीने में खुलते हैं, इसके बाद यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी जा सकती है मंदिर के कपाट नवंबर के अंतिम सप्ताह में बंद होते हैं ।
बद्रीनाथ धाम के जो पुजारी हैं ,वे दक्षिण भारत के निवासी होते हैं जिनको रावल भी कहा जाता है।
बद्रीनाथ धाम से थोड़ी दूरी पर एक प्रसिद्ध जगह है जिसका नाम है कपाली यहां पर लोग अपने पितरों को पिंड अर्पित करते है।

माणा/ बसुंधरा जलप्रपात (Mana/Basundhara Chamoli in Hindi)

बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर की दूरी पर Chamoli District का अंतिम गांव माणा स्थित है जो अब सड़क मार्ग से भी जुड़ चुका है। माणा से थोड़ी दूरी पर भीमपुल नामक स्थान है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है, यहां पर सरस्वती नदी के ऊपर एक विशालकाय पत्थर रखा हुआ है जिसको भीमपुल के नाम से जाना जाता है ।

माणा गांव के आसपास अनेक ऐसे स्थान है जहां पर स्थान है जहां पर पर्यटक घूम सकते हैं व्यास गुफा गणेश गुफा मुचकुंद गुफा इन सभी गुफाओं का पौराणिक महत्व भी है, कहा जाता है कि इन्हीं गुफाओं में वेदों की रचना हुई थी।

भीमपुल के ठीक ऊपर से सरस्वती नदी का उद्गम होता है यहां पर सरस्वती नदी अपने रौद्र रूप में बहती है भीम पुल से ठीक नीचे लगभग 200 मीटर की दूरी पर यह नदी लुप्त हो जाती है

इस जगह का नाम केशव प्रयाग है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां से सरस्वती नदी भूमिगत हो जाती है और भूमि के अंदर ही अंदर बहती है भीम पुल से 3 किलोमीटर आगे वसुंधरा जलप्रपात है जो ऊंचे ऊंचे बर्फीले पर्वतों एवं ग्लेशियरों के मध्य में स्थित है।

यह जलप्रपात 150 मीटर की ऊंचाई से गिरता है जिससे इसकी सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं। माणा के आसपास का नजारा बहुत ही खूबसूरत है, जिससे मन को अपार शांति का अनुभव होता है।

फूलों की घाटी (Valley of flowers in Hindi)

फूलों की घाटी (Valley of flowers) बद्रीनाथ मार्ग पर Chamoli District में स्थित है, जोशीमठ से 15 किलोमीटर दूर गोविंदघाट नामक स्थान है जहां से फूलों की घाटी के लिए पैदल ही जाना पड़ता है । गोविंदघाट से फूलों की घाटी की दूरी 16 किलोमीटर है ,इस घाटी में सैकड़ों प्रजातियों के पुष्प खिलते जो इस घाटी को बहुत ही मनोरम बनाते है ।

इस घाटी को अंग्रेजी में वैली ऑफ फ्लावर्स के नाम में वैली ऑफ फ्लावर्स के नाम के नाम से भी जाना जाता है वर्ष 2005 में यूनेस्को द्वारा फूलों की घाटी को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया ।

फूलों की घाटी में भ्रमण के लिए अगस्त- सितंबर का महीना सर्वोत्तम माना गया है फूलों की घाटी को सर्वप्रथम एक अंग्रेज पर्वतारोही के द्वारा खोजा गया था । इस अद्भुत घाटी का विचरण करने के पश्चात उन्होंने अपनी एक किताब प्रकाशित करवाई थी जिसका नाम वैली ऑफ फ्लावर था इसी के बाद पूरी दुनिया ने इस घाटी के विषय में जाना था।

 हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib in Hindi)

हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) जोशीमठ से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह स्थान सात सात भव्य बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरा हुआ है । इन पर्वतों के मध्य एक स्वच्छ जल की झील है जिसका पानी साफ एवं स्वच्छ है इस झील से हिमगंगा नामक एक छोटी नदी निकलती है।

इस झील के समीप एक गुरुद्वारा है यह गुरुद्वारा सिक्कों का पवित्र धाम है जहां वर्षभर सिक्कों का पवित्र धाम है जहां वर्षभर लाखों श्रद्धालु इस पवित्र धाम के दर्शन करने के लिए हेमकुंड साहिब आते हैं।

हेमकुंड साहिब जाने के लिए गोविंदघाट से केवल पैदल ही केवल पैदल ही सफर तय किया जाता है, यह स्थान फूलों की घाटी के समीप ही स्थित है। हेमकुंड साहिब में केवल गर्मी के मौसम में ही जाना संभव है नवंबर से अप्रैल तक यहां अत्यधिक बर्फ होती है जिस कारण यहां जाना बहुत मुश्किल काम माना जाता है

हेमकुंट साहिब में रात्रि विश्राम की कोई उचित व्यवस्था पर्यटकों के लिए अभी तक नहीं है रात को अक्सर पर्यटक घाघंरिया या गोविंदघाट में ही रुकते हैं । गर्मी के मौसम में या यात्रा सीजन में यहां कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अस्थाई तंबू लगा दिए जाते हैं जिसमें पर्यटकों को सभी प्रकार की सुविधा प्रदान की जाती है।

गैरसैंण (Gairsain Uttarakhand in Hindi)

गैरसैण (Gairsain) उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है यहां पर उत्तराखंड विधानसभा भवन एवं अन्य कार्य प्रगति पर है । यह सभी कार्य निकट भविष्य में जल्दी पूरे हो जाएंगे गैरसैण गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल का केंद्र बिंदु है।

गैरसैण एक खूबसूरत प्राकृतिक नजारों से भरपूर शहर है गैरसैंण देहरादून से लगभग 265 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गैरसैंण समुद्र तल से लगभग 5750 फुट की ऊंचाई पर स्थित है गैरसैंण का अर्थ है गैर यानी गहरा सैंण यानी मैदान ।

एक ऐसा स्थान जो गहरा एवं समतल है गैर सैंण मैदानी तथा प्रकृति का सुंदरतम भू- भाग है। गैरसैंण आने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है जहां से गैरसैण की दूरी लगभग 205 किलोमीटर है ।

गैरसैंण आने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है काठगोदाम और रामनगर जहां से गैरसैंण की दूरी कर्मश 180 एवं 160 किलोमीटर है सड़क मार्ग से गैरसैण के लिए दिल्ली से उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें आईएसबीटी से चलती है जो 10 से 12 घंटों में गैरसैंण पहुंचा देती है ।

राजधानी के तौर पर गैरसैंण को 1960 के दशक से ही आगे किया जाता रहा है उत्तराखंड आंदोलन के समय गैरसैंण को ही राज्य की प्रस्तावित राजधानी के तौर पर माना गया है । गैरसैंण एक खूबसूरत पर्वतीय नगर नगर है जो अपने आप में कई प्राकृतिक सुंदरता समेटे हुए हैं गर्मी के मौसम में यहां घूमने का आनंद बहुत ही रोमांच भरा होता है।

कर्णप्रयाग (Karnprayag Uttarakhand in Hindi)

कर्णप्रयाग (Karnprayag) के विषय में ऐसी मान्यता है कि कर्णप्रयाग दानवीर कर्ण की तपस्थली रही है । कर्णप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर अलकनंदा एवं पिंडर नदी के संगम पर बसा नगर है पुरानी मान्यताओं के अनुसार इसी स्थान पर सूर्यदेव ने दानवीर कर्ण दानवीर कर्ण को कवच कुंडल वह तुणीर दिए थे ।

यहां पर अनेक छोटे-छोटे मंदिर स्थित है जो इस नगर की नगर की अत्यधिक शोभा बढ़ाते हैं ,यह नगर निकट भविष्य में रेल मार्ग द्वारा भी जुड़ जायेगा। जिससे पर्यटकों को यात्रा करने में और आसानी होगी और पर्यटकों की यात्रा अधिक मंगल में होगी साथ ही यह यात्रा taxi एवं बसों की यात्राओं से काफी सस्ती भी होगी ।

इस नगर के रेल मार्ग द्वारा जुड़ जाने से भविष्य में पर्यटकों की संख्या में और अधिक इजाफा होगा कर्णप्रयाग मैं यात्रियों के लिए रहने खाने की उचित व्यवस्था है। यहां पर सस्ते दामों पर साफ एवं स्वच्छ होटल एवं रेस्टोरेंट्स उपलब्ध हो जाते हैं।

Chamoli District कैसे पहुंचे

चमोली (Chamoli District) उत्तराखंड का पहाड़ी जिला है जो देश की राजधानी दिल्ली से 440 किलोमीटर दूर है और राज्य की राजधानी देहरादून से लगभग 251 किलोमीटर दूर है, यहां पर विभिन्न माध्यमों से पहुंचा जा सकता है ।

हवाई मार्ग द्वारा

देश की राजधानी दिल्ली से नियमित तौर पर राज्य की राजधानी देहरादून के पास स्तिथ जौली ग्रांट एयरपोर्ट के लिए प्रतिदिन कई फ्लाइट है, जो मात्र आधे घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंच जाती है, जिसका किराया लगभग 5000 – 2000 तक हो सकता है।

यात्रा सीजन में (एच ए एल) कंपनी द्वारा छोटे-छोटे चॉपर भी देहरादून से सीधे उड़ान भरते हैं जो आपको सीधा बद्रीनाथ धाम पहुंचाते हैं। Chamoli District में गोचर नामक स्थान पर एक हवाई पट्टी विकसित की जा रही है। यहां से भविष्य में दिल्ली से देहरादून या अन्य स्थानों के लिए उड़ानें भरी जा सकती है।

रेल मार्ग द्वारा

चमोली गढ़वाल जाने के लिए अभी सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है दिल्ली या अन्य स्थानों से आप रेल मार्ग द्वारा हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश या देहरादून पहुंच सकते हैं। निकट भविष्य में सन 2024 -25 के आसपास तक चमोली रेल मार्ग द्वारा भी जुड़ जाएगा। इस रेल मार्ग का कार्य अभी गतिमान है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का सफर आप रेल मार्ग द्वारा भी कर सकते हैं जिससे Chamoli District पहुंचना और भी आसान और सुगम हो जाएगा।

सड़क मार्ग द्वारा

Chamoli District उत्तराखंड के अन्य स्थानों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। यदि आप दिल्ली से चमोली आना चाहते हैं तो दिल्ली आईएसबीटी (कश्मीरी गेट) से नियमित तौर पर उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें इस रूट के लिए चलती है, जिससे आप आसानी से चमोली पहुंच सकते हैं।

साथ ही राज्य के अन्य स्थानों से भी यहां के लिए बसें और टैक्सी आसानी से उपलब्ध है। चमोली जाने के लिए इस राजमार्ग को ऑल वेदर रोड मैं शामिल किया गया है, जिससे यहां पहुचना आसान है।

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