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हयौऊ गॉव – देवभूमि उत्तराखंड का एक सुन्दर गांव

हयौऊ गॉव – देवभूमि उत्तराखंड का एक सुन्दर गांव

हयौऊ गांव – भौगोलिक परिदृश्य। (Hayou Village – Geographical Scenario in Hindi)

हयौऊ गांव (hayou Village) उत्तर भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले के चकराता तहसील एवं कालसी ब्लॉक के अंतर्गत आता है। यह जिला मुख्यालय एवं राज्य की राजधानी देहरादून से मात्र 115 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, तहसील मुख्यालय चकराता से इसकी दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। हयौऊ 30.65 उत्तरी अक्षांश व 77.93 पूर्वी देशान्तर में स्थित है। यह गांव प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत पक्की सड़क से जुड़ा हुआ है।हयौ गांव (Hayou Village) जौनसार बावर के खत शैली के अंतर्गत आता है। खत शैली संभवत संभवत जौनसार बावर की सबसे बड़ी खत है।

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शैली खत का मुख्यालय ग्राम नगऊ है, जो कि चतंरु गांव है। हयौऊ के आसपास का वातावरण अत्यंत मनोरम एवं सुंदर है। यह हयो टगरी ग्राम सभा के नाम से जाना जाता है। हयो  गांव भी अत्यंत सुंदर है। हयोऊ, कुनावा व टगरी के मध्य में स्थित है। यह मुख्यतः कृषि प्रधान गांव है, और गांव के लोग हर प्रकार की नगदी फसलें एवं सब्जियां उगाते हैं। इस गांव की सरहद दूर तक फैली हुई है। माख्टी गाड़ से लेकर खत बनगांव एवं खत द्वार के समीप तक है।

हयौऊ गांव (Hayou Village) पर्यटन की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है यहां पर विलेज टूरिज्म एवं इको टूरिज्म की अनेक संभावनाएं अपने आप आप में समेटे हुए हैं। यह प्राकृतिक रूप से भी सक्षम है यह एक चट्टान एवं धार के ऊपर स्थित है। जहां बाढ़ भूकंप एवं बादल फटने की संभावना अत्यंत न्यून है। हयो गांव के ठीक सामने नगऊ ,क्यावा गॉव व माख्टी पोखरी बाजार एवं चोटी पर शीलगुर का मंदिर है।

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इसके साथ-साथ गढ़ बैराट, चुरानी टॉप का भी मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है। गांव के आसपास खड़की, विमल एवं फलदार वृक्ष है, जो गांव की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। इस प्रकार के पेड़ आच्छादित हैं। गांव के आसपास गांव के आसपास कई प्रकार की प्राकृतिक जड़ी बूटियां पाई जाती है। जो अनेक रोगों का उपचार में काम आती है। गांव के आसपास पशुओं के लिए विशाल चारागाह एवं बांज, मरू एवं अन्य औषधीय पेड़ पौधे पाए जाते हैं।

गांव का मौसम पर्यटन के लिहाज से साल भर सुहावना रहता है। यहां के लोगों को पीने का पानी प्राकृतिक श्रोतों से साल भर मिलता रहता है। गांव में संचार की उपलब्धता अधिकतर भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। यह गांव अत्यंत मनोरम है, जोकि भविष्य में पर्यटन की संभावनाएं को अपने आप में संजोए हुए हैं, हयौ से ठीक उत्तर में हयो टॉप नामक जगह है, जहां से विशाल हिमालय का मनोहर दृश्य व मसूरी के पहाड़ भी दिखाई देते है। यह स्थान एक अत्यंत शांत है। जहां जाकर आप प्रकृति को करीब से महसूस कर सकते है।

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इस जगह पर सैकड़ों पेड़ पोंधो की प्रजातियां है। यहां कहीं प्रजाति के जंगली जानवर भी पाए जाते हैं। हयो टॉप समुद्र तल से 7500 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। हयौ टॉप से आसपास के सभी गांव, चकराता बाजार, मसूरी व विकासनगर का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। यहां पर भविष्य में अनेक प्रकार के साहसीक खेलों का आयोजन भी हो सकता है। जिसमें पैराग्लाइडिंग प्रमुख है।

हयौऊ गांव – ऐतिहासिक परिदृश्य (Hayou Village – Historical Scenario in Hindi)

हयौऊ का ऐतिहासिक परिदृश्य अत्यंत रोचक है। पूर्वजों के अनुसार या पौराणिक मान्यता के अनुसार जहां आज गांव में लगभग 50 परिवार है। यहां पर शुरू में एकमात्र ब्राह्मणों का परिवार निवास करता था ।उस समय लोग अपने दैनिक आवश्यकताओं की चीजों को पैदल मार्ग से ही मुख्य बाजार से लाया करते थे उन दिनों आवागमन का एकमात्र विकल्प पैदल यात्रा करना ही होता था लोग जब अपने गांव से बाजार के लिए जाते थे तो एक समूह में ही जाते थे। जिससे यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को आपस में साझा कर सकें और जिस उद्देश्य के लिए यात्रा कर रहे हैं उसमें पूर्ण रूप से सफल हो जाएं ।

उस समय के लोग सच्चे एवं ईमानदार होते थे ठीक ऐसे ही घटना कुछ हयो गांव के बसने की भी है। पौराणिक मान्यता है कि सर्वप्रथम खत बणगांव के पास ग्राम टुगंरोली के आसपास एक जगह या खेड़ा या छानी (सेंधवा) से 3 लोग अपने घर के सामान हेतु शॉर्टकट रास्ते से तत्कालीन चुड़पुर (चांदपुर) वर्तमान विकासनगर गए हुए थे। सामान लेकर जब वे लोग विकासनगर से अपने घर सेंधवा वापस लौट रहे थे, तो अचानक मौसम खराब हो गया गया और तेज बारिश एवं जोर-जोर से बिजली चमकने लगी शाम का समय था।

वे अपने घर तक उस बारिश एवं तेज हवाओं में नहीं पहुंच सकते थे रास्ते में जब बारिश बहुत तेज हो गई उन लोगों को सामने एक घर दिखाई दिया वे लोग वहां चले गए बारिश के पानी से बचने के लिए उन लोगों ने उस घर के बरामदे /चौबारा का सहारा लिया वे लोग जिस घर पर पहुंचे थे वह घर एक ब्राह्मण दंपति का था उनके पास खूब कृषि योग्य भूमि थी।

संयोग वंश उस ब्राह्मण दंपति ने उस दिन पहाड़ी व्यंजन (पिनवा) बना रखे थे, लेकिन शायद वह कम बना होगा और इसी कारण से वे लोग उन राहगीरों को अपने घर नहीं बुला रहे थे, जो सेंधवा के लोग बरामदे /चौबारे में खड़े थे उन्हें रात तक बहुत भूख प्यास लगी थी लेकिन उन लोगों को ब्राह्मण दंपति ने ऊपर यानी अपने घर में नहीं बुलाया वह लोग भी चुपचाप बैठ कर रात काटने लगे कुछ समय बाद आसमान में बहुत तेज गर्जन हुई और उस घर पर बिजली गिर गई।

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जिससे ब्राह्मण दंपति का तत्काल देहावसान हो गया, लेकिन डर के मारे वे लोग भी उस समय घर के अंदर नहीं गए और रात चौबारे/बरामदे में काटी सुबह जब उन लोगों ने देखा कि घर के दरवाजे खिड़कियां बहुत देर तक नहीं खुले तो वे लोग किसी तरह घर के अंदर घुस गए घर के अंदर जाने के बाद उन लोगों ने देखा कि ब्राह्मण दंपति की मौत हो चुकी है। उन लोगों ने सारी रात बरामदे में काटी थी और खाना पीना भी नहीं खाया था, जिस कारण उन लोगों को बहुत ही भूख लग गई थी उन्होंने सबसे पहले जो ब्राह्मण दंपति ने पकवान बनाए थे। उसको खाया और उसके बाद उन लोगों का दाह संस्कार किया।

पूर्वजों की कहावतों के अनुसार यह तीनों आपस में भाई थे फिर यह लोग अपने बीवी बच्चों को यहीं पर ले आए और यहीं पर पर निवास करने लगे तीनो भाई यहां पर तत्कालीन हयो गांव की नींव रखी और बड़े कुशाल तरीके  से यहां पर अपना कृषि का व्यवसाय करने लगे इन तीनों भाइयों ने भी काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया एक भाई भेड़ बकरी को चराने का  काम करता था दूसरा भाई सामाजिक कार्यों को देखता था, तीसरा भाई कृषि के काम को देखता था। जो भाई बकरियां भेड़ों को चराने का काम करता था वह हमेशा अपने साथ एक वफादार कुत्ते को रखता था।

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पूर्वजों की कहावतों के अनुसार जब वह भेड़ बकरियों को चराने के लिए वर्तमान कुनावा गांव को छोड़कर दूसरी जगह ले जाता था। जब वह दिन में अपनी भेड़ बकरियों को एक जगह आराम करने के लिए इकट्ठा करता था। वह घर से अपने साथ खाना ले जाकर रखते थे, तो अपने और उनके वफादार कुत्ते के लिए हमेशा खाना कम पड़ जाता था। लेकिन जब वह भेड़ बकरियों को वर्तमान कुनावा गांव के पास आराम करने के लिए  ले जाते तो जो खाना वह घर से लेकर जाते थे हमेशा अपने आप और कुत्ते को खिलाने के बाद एक दो रोटी बची जाती थी।

उस समय के लोग सच्चे ईमानदार लोग हुआ करते थे उस भेड़ पालक भाई ने सोचा कि वास्तव में यह जगह रहने बसने के लिए सबसे उत्तम है। वह भेड़ पालक दोनों भाइयों  से विदा लेकर हमेशा के लिए कुनावा नामक जगह बसने चले गया। अब हयो  गांव में दो भाइयों ने खूब खेती और पशुपालन का काम किया एक भाई हमेशा आने जाने एवं घर की संपूर्ण सामाजिक काम को देखने का काम करता था इसी बीच सामाजिक कार्य करने वाले भाई एक बार किसी काम से वर्तमान बगुर (गयोऊ) जा रखे थे बगुर गांव में भी तत्कालीन समय में कुछ ऐसी घटना घटित हुई कि वह भाई भी वहां जाकर बस गया।

इस प्रकार से उन तीनों भाइयों ने तीन गांव हयोऊ,  कुनावा , बगुर के उत्थान में अपना अपना योगदान दिया और अपने वंश को आगे बढ़ाया आज भी इन तीनों गांव में आपस में कोई शादी विवाह संस्कार  आपस में नहीं किए जाते है, बल्कि आज भी अपनी पुरानी मान्यताएं बनाए हुए हैं और सुख दुख के समय एक दूसरे के सहायता को तत्पर रहते हैं।

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हयौऊ गांव – वर्तमान परिदृश्य (Hayou Village – Present Scenario in Hindi)

वर्तमान समय में हयौऊ एक समृद्ध और खुशहाल गांव है। यदि हम यहां दादा, नाना की पीढ़ी और आज के समय की तुलना करें तो आज hayou के निवासी ज्यादा खुशहाल एवं संपन्न है। आज के hayou में लगभग प्रत्येक घर में पढ़ा-लिखा वर्ग निकल रहा है। जो अपने आप में उन्नति का एक प्रतीक है। hayou का अपने क्षेत्र मैं पुराने समय से ही एक मान सम्मान है। जो आज भी बरकरार है। hayou में आज के युवा वर्ग हर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां पर वर्तमान समय में उन्नत खेती के साथ-साथ व्यापार, निजी, सरकारी व अर्ध सरकारी सेवा में योगदान दे रहे है।

अभी हाल ही में कुछ वर्षों से लोगों का रुझान बागवानी की ओर डायवर्ट हो रहा है। जिसमें कहीं लोगों ने सेब और नींबू के बगीचे भी लगाए हैं। गांव के मध्य में बने ईस्ट आराध्य देवता चालदा महासू का एक भव्य मंदिर है। जिससे पूरे ग्राम वासियों को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रहती है। आज हयौऊ पूरी लगन से गांव के विकास मैं लगा हुआ है।

hayou के आसपास का नजारा बेहद सुंदर एवं आकर्षक है। यहां पर  चीड़ देवदार  बुरांश एवं अन्य जंगली पौधे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गांव के पश्चिम में मां काली का का मंदिर एवं पूर्व में शिलगुर देवता का मंदिर है। इसके साथ ही उत्तर की और परशुराम व गांव के बीच में चालदा महाराज का मंदिर है। सभी के प्रति गांव के लोगो कि अपार आस्था है, जो सुख दुःख में यहां के लोगो की रक्षा करते है।

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वर्तमान परिदृश्य में hayou ट्रेकिंग के लिए अति उपयुक्त है।  यदि यहां पर पर्यटक ट्रैकिंग करना चाहते हैं तो यहां पर सुविधानुसार छोटे एवं बड़े-बड़े ट्रैकिंग मार्ग स्थित है। जिसमें पर्यटक आसानी से ट्रैकिंग कर सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में यहां पर प्राथमिक विद्यालय एवं राजकीय उच्चतर  माध्यमिक विद्यालय स्थित है Hayou के पड़ोसी गांव tagri कुनावा Shibou, Kaitri है। आवागमन के लिए यहां से हर समय आपको गाड़ी उपलब्ध हो जाती है निकट भविष्य में यह रूट जनपद उत्तरकाशी के डामटा नामक स्थान पर कनेक्ट हो जाएगा जिससे क्षेत्र में पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा।

हयौऊ गाँव का गूगल नक्शा  (GOOGLE MAP OF HAYOU CHAKRATA)

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